
Sunil Gavaskar on Lakshya Sen: भारत के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) का मानना है कि युवा बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन (Lakshya Sen at Paris Olymlics 2024) में चैम्पियन बनने के सभी गुण हैं लेकिन पेरिस ओलंपिक पदक से चूकने के बाद उन्हें मानसिक ट्रेनिंग पर ध्यान देने की जरूरत है. सेन को सेमीफाइनल और कांस्य पदक के प्लेऑफ में हार का सामना करना पड़ा जबकि दोनों ही मुकाबलों में वह बढ़त बनाये हुए थे जिससे ओलंपिक पदक उनके हाथ से निकल गया. गावस्कर ने यहां एक कार्यक्रम के इतर कहा, "मैं थोड़ा निराश था क्योंकि सेमीफाइनल और कांस्य पदक के दोनों मुकाबलों में लक्ष्य ने बढ़त बनाई हुए थी लेकिन इसे बरकरार नहीं रख सके. इसलिये क्या यह मानसिक समस्या है क्योंकि इस पर सच में गौर करने की जरूरत है".
उन्होंने कहा, "प्रकाश पादुकोण ने भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि वह कैसे हार गये. कभी कभार ऐसा हो सकता है कि आप बस मैच गंवा बैठे. हर दिन हम सभी के साथ भी ऐसा होता है. गावस्कर ने कहा, "शायद यह कुछ ऐसा है जिस पर उन्हें ध्यान देने की जरूरत है. मैंने कहीं पढ़ा कि प्रकाश ने कहा कि उन्हें शायद 'माइंड ट्रेनिंग' पर ध्यान देना चाहिए. यह कुछ ऐसा है जिस पर उन्हें ध्यान देना चाहिए."
विक्टर एक्सेलसन के खिलाफ सेमीफाइनल में लक्ष्य सेन को मिली हार पर गावस्कर ने स्पोर्ट्स्टार के कॉलम में लिखा, "सेमीफाइनल में 20-17 और 7-0 की बढ़त को गंवाते देखना और फिर पहला गेम आसानी से जीतने के बाद ब्रॉन्ज मेडल मैच (ली ज़ी जिया के खिलाफ) हारना वाकई दिल तोड़ने वाला रहा होगा. उन्होंने, विमल कुमार, BAI और सरकार के TOPS के साथ मिलकर हर संभव कोशिश की थी, लेकिन जब मुश्किल समय आया, तो लक्ष्य भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान (रोहित शर्मा) के शब्दों में 'गार्डन में घूमने वाले' थे.
अपने कॉलम में गावस्कर ने आगे लिखा, " सेमीफाइनल और ब्रॉन्ज मेडल के मैच देखने वालों को लगा कि लक्ष्य ने अपने रैकेट को देखने के तरीके में अपनी सोच और एकाग्रता खो दी थी, जब वह पॉइंट्स के बीच या चेंजओवर के दौरान अपनी पानी की बोतल से पानी पीता था..मैं पूरी तरह से गलत हो सकता हूं, लेकिन टीवी पर, यह एक खाली भाव की तरह लग रहा था, और यह आमतौर पर एक संकेत है कि मन भटक गया है. एकाग्रता और ध्यान ऐसी चीजें हैं जो कोई भी कोच या ट्रेनर कभी नहीं सिखा सकता . इसे एथलीट द्वारा अन्य चैंपियनों को देखकर और आंतरिक संकल्प के साथ सालों में विकसित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कोई विशिष्ट शेड्यूल नहीं है. हां, माइंड ट्रेनर आसपास हैं, लेकिन वे केवल इतना ही कर सकते हैं, इससे ज्यादा नहीं..यह एथलीट के भीतर होना चाहिए."
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