
21वीं सदी के पहले दशक में रिकी पोंटिंग और एम एस धोनी (Ricky Ponting and MS Dhoni) विश्व के दो सबसे सफलतम कप्तानों में से थे. बता दें कि धोनी साल 2008 में तीनों फॉर्मेट में भारत के कप्तान बने थे वहीं साल 2017 में पूरी तरह से कप्तानी छोड़ दी थी. जबकि रिकी पोंटिंग 2004 से 2011 तक ऑस्ट्रेलिया के कप्तान थे. 2000 के दशक में स्टीव वॉ के बाद रिकी पोंटिंग ने बेहतरीन उत्तराधिकारी की तरह ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी की. इससे पहले साल 1998 में पोंटिंग ने वॉ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया को एक जीत के अलावा 2 और विश्व खिताब भी दिलवाए. ऑस्ट्रेलिया भी पोंटिंग की कप्तानी में दूसरी टीमों के लिए सबसे कठिन टीम थी. पोंटिंग के सर्वकालिक महान बल्लेबाज़ बनने के अलावा उनके पास टीम में शेन वॉर्न, एडम गिलक्रिस्ट, ग्लेन मैकग्रा, मैथ्यू हेडन और माइकल क्लार्क जैसे महान खिलाड़ी भी थे.
ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिनर ब्रेड हॉग जिन्होंने कई वर्षों तक पोंटिंग के नेतृत्व में खेला उन्होंने अपने यू ट्यूब चैनल पर बयान देते हुए कहा है कि दोनों कप्तानों को अलग करना मुश्किल है. हालांकि वे आस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग की तुलना में धोनी को ऊपर रखेंगे. उन्होंने कहा कि दोनों कप्तानों को टीमें विरासत में मिली. रिकी पोंटिंग के पास एक शानदार टीम थी. एम एस धोनी के पास भी एक बेहतरीन टीम थी. मेरे लिए दोनों ने असाधारण रूप से दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया. दोनों का रिकॉर्ड शानदार हैं. यहीं पर उन्होंने कहा कि पोंटिंग की तुलना में धोनी को भारतीय क्रिकेट की पॉलिटिक्स से गुजरना पड़ा.
उन्होंने आगे कहा कि “रिकी पोंटिंग के साथ दूसरी बात ये रही कि उनके आसपास बहुत सारे क्रिकेटर थे जो वास्तव में अनुभवी थे और अपनी भूमिकाओं को जानते थे और साथ ही यह भी जानते थे कि क्या करना है. उन्हें केवल खेल के कुछ पहलुओं पर नियंत्रण रखना था. अधिकांश खिलाड़ियों का रवैया, खिलाड़ियों का अनुशासन, खिलाड़ियों की योजना यह जानना कि उन्हें क्या करना है, सब पहले से जानते थे. “यह एक कठिन है, लेकिन एमएस धोनी ने भारत में जो अतिरिक्त राजनीति थी, उसका भी सामना किया. इसलिए पोंटिंग की तुलना में धोनी ऊपर हैं, क्षमा करें, रिकी!
पोंटिंग के विपरीत, धोनी को किसी भी प्रारूप में अच्छी मंझी हुई टीम विरासत में नहीं मिली थी. क्योंकि जब धोनी कप्तान बने तब राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर ये सभी अपने करियर की सांझ में थे लेकिन धोनी ने टीम को इतनी अच्छी तरह से संभाला कि भारत ने इस अवधि में ट्राफियां जीत लीं . विराट कोहली, रोहित शर्मा, रवींद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन सभी उनके अंडर ही फले-फूले.
वह एकमात्र ऐसे कप्तान हैं जिन्होंने तीनों आईसीसी ट्रॉफी जीती हैं, 2007 टी20 विश्व कप जीता था, जो कप्तान के रूप में उनका पहला काम था, 2011 विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी. जबकि भारत उनके नेतृत्व में पहली बार दुनिया की नंबर 1 टेस्ट टीम बना, हालांकि धोनी क्रिकेट के सबसे लंबे फॉर्मेट यानि टेस्ट क्रिकेट में उतने सफल कप्तान नहीं थे, अंततः 2014 में ही उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया.
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