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This Article is From May 13, 2023

Mohammed Siraj के शुरूआती करियर में हुआ था अनोखा 'चमत्कार', जिससे बदल गई थी गेंदबाज की किस्मत

Mohammed Siraj's early struggle इस टॉक शो में सिराज (Story of Mohammed Siraj's early struggle) ने एक दिलचस्प घटना भी बताई कि कैसे उनका चयन अंडर 23 टीम में हुआ कैसे एक चमत्कार ने उनकी तकदीर बदल कर रख दी थी.

Mohammed Siraj के शुरूआती करियर में हुआ था अनोखा 'चमत्कार', जिससे बदल गई थी गेंदबाज की किस्मत
इस चमत्कार के कारण बदल गई थी किस्मत

Mohammed Siraj: मोहम्मद सिराज ने काफी कम समय में विश्व क्रिकेट में अपनी पहचान बना ली है. हाल ही में वनडे में सिराज दुनिया के नंबर वन गेंदबाज बनकर कमाल कर दिखाया. इस समय सिराज भारतीय टीम के अहम खिलाड़ी हैं. लेकिन सिराज के लिए टीम इंडिया में आने का सफर काफी मुश्किल भरा रहा है, टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने से पहले ही उनके पिता के देहांत हो गया था. वहीं, अब सिराज ने अपने शुरूआती दिनों के संघर्ष को याद किया है. 'ब्रेकफास्ट विद चैंपियंस' के लेटेस्ट शो में सिराज ने अपने शुरूआती दिनों के संघर्ष को लेकर बात की और कहा कि, उन्होंने 19 साल तक टेनिस बॉल से क्रिकेट खेली थी. लेदर बॉल और और जूते पहनकर खेलने का पहला अनुभव उन्हें साल 2019 के बाद से हुआ. 

इस टॉक शो में सिराज (Story of Mohammed Siraj's early struggle) ने एक दिलचस्प घटना भी बताई कि कैसे उनका चयन अंडर 23 टीम में हुआ. सिराज ने शो में बताया कि अंडर 23 टीम में जब उनका चयन हुआ था तो उस समय उन्हें डेंगू  हो गया था. जब टीम अंडर 23 खेलने के लिए जा रही थी तो वो अस्पताल में थे. 'मैं टेंशन में था, मेरे ब्लड सेल्स काफी कम हो गए थे, यदि मैं अस्पताल उस समय नहीं जाता तो मैं मर भी सकता था. उस समय तब मैंने टीम के कोच को ये बात बताई कि मैं अस्पताल में हूं, टीम के साथ नहीं आ सकता हूं. मैं उस समय नया-नया टीम में था, किसी ने मेरे बात पर भरोसा नहीं किया. सभी को लगा कि मैं झूठ बोल रहा हूं'. उस समय कोच ने मुझसे कहा कि, 'यदि तुम यहां नहीं आओगे तो टीम से बाहर हो जाओगे. तब मैं काफी टेंशन में आ गया'. 

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सिराज ने आगे बताया कि, तब मैंने अपने पिता को उठाया और कहा कि, हमें प्रैक्टिस के लिए जाना होगा, नहीं तो वो हमें टीम से बाहर कर देंगे, पापा ने कहा, 'पक्का जाएगा, तू गेंद डाल पाएगा ना..'. मैंने उस समय कहा कि, 'हां मैं कोशिश करूंगा, हम लोग प्रैक्टिस के लिए कहा, वहां गया तो मेरा हिम्मत काम नहीं कर रहा  था, लेकिन बॉलिंग तो डालना है. धीरे-धीरे करके मैंने गेंदबाजी करना शुरू किया'.

सिराज ने आगे ये भी कहा कि, 'जब मैंने अभ्यास करना शुरू किया तो मुझे उस टाइम पता भी नहीं चला कि मुझे डेंगू  है..मैंने वहां 100% बॉलिंग डाला, पूरा फील्डिंग किया, रनिंग किया और बैटिंग भी किया. उस समय मुझे ऐसा नहीं लगा कि मुझे डेंगू है. कुछ ऐसा कमजोरी भी नहीं लगा. बाद में मैंने जांच कराई तो डेंगू खत्म हो गया था. रातों रात डेंगू जा चूका था. जो चमत्कार होते हैं न उस टाइम मेरे को लगा कि चमत्कार होते हैं.'

सिराज ने बातचीत में ये भी कहा कि, कैसे भरत अरुण के कारण उन्हें अपने करियर में आगे बढ़ने का मौका मिला, सिराज ने कहा कि, टमैं आरसीबी में नेट बॉलर के तौर पर गया था. उस दौरान भरत अरुण मेरी गेंदबाजी को देखकर काफी खुश हुए थे. उन्होंने मेरे बारे में वीवीएस लक्ष्मण से भी बात की थी. बाद में अगली बार भरत अरुण हैदराबाद टीम के रणजी कोच भी बने थे. लेकिन रणजी में मेरा चयन नहीं हो पा रहा था. तब भरत अरुण जी ने मेरा चयन हैदराबाद की रणजी टीम में कियाट.  

रणजी ट्रॉफ़ी के 2016-17 के सीज़न में वे हैदराबाद की ओर से सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने थे. उस सीजन में सिराज ने 41 विकेट लिए थे. 

बता दें कि पहली बार सिराज आईपीएल 2017 में खेले थे. उन्हें सनराइजर्स हैदराबाद ने  2.6 करोड़ में ख़रीदा था. बाद में 2018 में सिराज आरसीबी की टीम का हिस्सा बने थे. तब से वे बैंगलौर टीम का हिस्सा हैं. इसके अलावा पहली बार सिराज का चयन भारतीय टीम में साल 2017 में हुआ था. 

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