
रणजी ट्राफी में सर्वाधिक विकेट लेने वाले महान दिग्गज लेग स्पिनर राजिंदर गोयल (Rajinder Goel) का उम्र संबंधी बीमारियों के कारण रविवार को रोहतक में निधन हो गया. वह 77 वर्ष के थे. उनके परिवार में पत्नी और पुत्र नितिन गोयल हैं जो स्वयं प्रथम श्रेणी क्रिकेटर (First-class cricket) रहे हैं और घरेलू मैचों के मैच रेफरी हैं. बायें हाथ के स्पिनर गोयल को घरेलू स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद कभी भारतीय टीम में जगह नहीं मिली क्योंकि वह उस युग मे खेला करते थे जबकि बिशन सिंह बेदी जैसे बेहतरीन स्पिनर भारत का प्रतिनिधित्व किया करते थे. इसी दौर में एक अन्य स्पिनर मुंबई के पदमाकर शिवालकर भी खेलते थे और उन्हें भी भारत की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिला. इस दिग्गज स्पिनर को एक अच्छे क्रिकेटर ही नहीं बल्कि भले इंसान के रूप में भी याद किया जाता है.
Former cricketer Rajinder Goel, aged 77, who holds the record for most wickets (637) in Ranji Trophy, India's premier first class competition passed away today. #RIP.
— Mohandas Menon (@mohanstatsman) June 21, 2020
In 157 FC matches he claimed 750 wickets, despite which he never played for India. He was a left arm spinner.
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) के पूर्व अध्यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘यह क्रिकेट के खेल और निजी तौर पर मेरी बहुत बड़ी क्षति है. वह इस देश में बायें हाथ के सर्वश्रेष्ठ स्पिनरों में से एक थे. संन्यास लेने के बाद भी उन्होंने इस खेल में बहुमूल्य योगदान दिया. राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिलने के बावजूद गोयल 1958-59 से 1984-85 तक घरेलू क्रिकेट में खेलते रहे. इन 26 सत्र में उन्होंने हरियाणा की तरफ से रणजी ट्राफी में 637 विकेट लिये जो राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रिकार्ड है. उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कुल 157 मैच खेलकर 750 विकेट लिये. वह बेदी थे जिन्होंने उन्हें बीसीसीआई पुरस्कार समारोह में सीके नायुडु जीवनपर्यंत उपलब्धि सम्मान सौंपा था. गोयल में लंबे स्पैल करने की अद्भुत क्षमता थी. जिस पिच से थोड़ी भी मदद मिल रही हो उस पर उन्हें खेलना नामुमकिन होता था.
Deeply saddened by the passing away of Shri Rajinder Goel, the highest wicket-taker in the history of Ranji Trophy. My heartfelt condolences to his family and loved ones. pic.twitter.com/6wIOfolnJc
— VVS Laxman (@VVSLaxman281) June 21, 2020
वह इतने लंबे समय तक खेलते रहे इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि वह विजय मांजरेकर के खिलाफ भी खेले और उनके बेटे संजय के खिलाफ भी। उन्हें 1974-75 में वेस्टइंडीज के खिलाफ बेंगलुरू में टेस्ट मैच के लिये टीम में चुना गया था. वह 44 साल की उम्र तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते रहे. सुनील गावस्कर ने अपनी किताब ‘आइडल्स' में जिन खिलाड़ियों को जगह दी थी उसमें गोयल भी शामिल थे.
Rajinder Goel was easily the most ‘contented' human being I've known...I used to envy his sense of ‘contentment' in my moments of turmoil..RIP ‘Goely'..You bowled yur heart out to keep Ranji Trophy alive..!! pic.twitter.com/U1ZZCQE7KW
— Bishan Bedi (@BishanBedi) June 21, 2020
गावस्कर ने अपनी किताब में लिखा है कि गोयल अपने लिये नये जूते और किट लेकर आये लेकिन उन्हें 12वां खिलाड़ी चुना गया. अगले टेस्ट मैच में बेदी की वापसी हो गयी लेकिन गोयल को फिर कभी देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका नहीं मिला. कपिल देव (Kapil dev) निश्चित तौर पर हरियाणा के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर रहे हैं लेकिन उनसे पहले गोयल थे जिन्होंने इस राज्य की गेंदबाजी की कमान बखूबी संभाल रखी थी.
The highest wicket taker in Ranji trophy cricket #RajinderGoel passes away, all I heard growing up was “what a fine left arm spinner Rajinder Goel was” I haven't seen you bowl sir, but you have left a legacy that will last forever. #RipRajindergoel
— Ashwin (During Covid 19)???????? (@ashwinravi99) June 22, 2020
कपिल देव की अगुवाई वाली हरियाणा ने जब 1991 में मुंबई को हराकर रणजी ट्राफी जीती थी तब गोयल उसकी चयनसमिति के अध्यक्ष थे. एक बार गोयल से पूछा गया कि क्या उन्हें इस बात का दुख है कि बेदी युग में होने के कारण उन्हें भारत की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिल, उन्होंने कहा, ‘‘जी बिलकुल नहीं. बिशन बेदी ( Bishan Singh Bedi) बहुत बड़े गेंदबाज थे.
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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं