
जारी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2020) में यह सही है कि चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत से ही समस्याएं रही हैं, लेकिन यह भी सही है कि उसके खिलाड़ियों से अभी भी 'जंग' उतरा दिखाई नहीं पड़ रहा है. टूर्नामेंट ने आधे से ज्यादा पड़ाव पर कर लिया है, लेकिन न चेन्नई लय में आ सही और न ही उसके वरिष्ठ ही जरूरत ही मौके पर कुछ कर सके. वहीं, कप्तान एमएस धोनी (MS Dhoni) के तर्क ऐसे कि चर्चा का विषय बन गए. उदाहरण के तौर पर धोनी (Dhoni) ने पिछले में युवाओं को मौके देने के नाम पर कहा था कि उन्हें युवाओं में स्पार्क नहीं दिखा. और मुंबई इंडियंस के खिलाफ मुकाबले में चेन्नई की बल्लेबाजी का जनाजा निकल गया!!
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ऐसे में सवाल यह है कि अनुभवियों का स्पार्क भला कहां दिखाई पड़ा. मुंबई इंडियंस के खिलाफ जब फैफ डु प्लेसी और खुद धोनी सहित तमाम वरिष्ठों को एक्स्ट्रा जिम्मेदारी इस स्थिति में दिखानी थी कि वॉटसन नहीं खेल रहे थे और युवाओं को मौका दिया था, तो चेन्नई की हालत ऐसी हुई, जो पिछले 12 साल में नहीं ही हुई थी.
मसलन पावर-प्ले में चेन्नई का इतना बुरा हाल हुआ कि छह ओवर बाद चेन्नई का स्कोर 5 विकेट पर 24 रन था. वास्तव में, 12 साल के इतिहास में चेन्नई की पावर-प्ले में ऐसी दुर्गति नहीं ही हुई थी. वैसे जिस अंदाज में इन दिनों एमएस धोनी पुरस्कार वितरण के दौरान अपनी बातें रख रहे हैं, तो कोई आश्चर्य नहीं होगा कि यहां वह साल 2011 में कोच्चि में केरल टस्कर्स टीम का उदाहरण दे दें. तब कोच्चि टस्कर्स ने डेकन के खिलाफ पावर-प्ले मतलब शुरुआती 6 ओवरों में 29 रन पर छह विकेट गंवा दिए थे.
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ऐसे में एमएस धोनी के पास इस बाबत सवाल पूछने पर यह कहने के लिए है कि हमारे तो पांच विकेट गिरे, तब कोच्चि ने तो छह विकेट गंवाए थे. कुल मिलाकर प्रशंसकों में चेन्नई के हाल से बहुत ही गुस्सा है. क्रिकेट पंडितों के बीच चर्चा हो रही है, तो एमएस धोनी के आलोचकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
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