'इस नियम' के कारण एमसीसी ने गेंदबाज के "नए प्रयोग" को गलत करार दिया, VIDEO

Updated: 09 November 2018 17:06 IST

मामला खेल के नियमों की  संरक्षक मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) तक पहुंचा. और अब इस मामले पर दिग्गज संस्था ने बयान जारी अंपायर के फैसले को पूरी तरह से सही ठहराया है. चलिए बारी-बारी से आप एमसीसी के तर्क जान लीजिए

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एमसीसी का लोगो

नई दिल्ली:

क्रिकेट में हालिया समय में नई-चीजें सामने आई हैं. ये ज्यादातर बदलाव बल्लेबाजों की तरफ से देखने को मिले. मतलब स्विच हिट,  दिल स्कूप, रिवर्स स्कूप शॉट वगैरह-वगैरह! इसकी बड़ी वजह शायद टी-20 क्रिकेट, इसका विकास और जरूरतें रहीं. बदलाव हुआ, तो बल्लेबाजी ही नहीं खेल का ही चेहरा-मोहरा भी बदल गया. लेकिन हाल ही में भारत की घरेलू सीके नायुडू (अंडर-23) ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश के लेफ्ट-आर्म स्पिनर शिवा सिंह का 'नया कारनामा' चर्चा का विषय बन गया. इस मामले की गूंज केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों तक ही नहीं, बल्कि क्रिकेट के नियमों की संरक्षक संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी ) तक पहुंच गई. 

हुआ यह है कि शिवा सिंह ने बल्लेबाज को गच्चा देने के लिए बिल्कुल आखिरी पलों में अपना एक्शन बदलकर दाएं के बजाय बाएं हाथ से गेंद फेंकी. यह गेंद फेंकने के दौरान शिवा सिंह पूरे 360 डिग्री घूम गए. बंगाल के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में अंपायर ने तुरंत ही इस डेडबॉल करार दिया. खिलाड़ियों और अंपायर के बीच काफी बहस भी हुई, लेकिन अंपायर विनोद सेशन अपने फैसले से टस से मस नहीं हुए. जब इस घटना का वीडियो वायरल हुआ, तो पूर्व दिग्गज बिशन सिंह बेदी सहित कई दिग्गजों ने गेंदबाज के समर्थन में आते हुए अंपायर के फैसले पर सवाल उठाया

मामला खेल के नियमों की  संरक्षक मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) तक पहुंचा. और अब इस मामले पर दिग्गज संस्था ने बयान जारी अंपायर के फैसले को पूरी तरह से सही ठहराया है. चलिए बारी-बारी से आप एमसीसी के तर्क जान लीजिए. 

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1. पहला तो यह कि खेल के नियम यह निर्देशित नहीं करते कि गेंदबाज का रन-अप कैसा दिखना चाहिए. नियम 21.1 के तहत गेंदबाज को अपने बॉलिंग के तरीके के बारे में बताना चाहिए. शिवा सिंह के मामले में यह लेफ्ट-आर्म राउंड द विकेट रहा है. लेकिन शिवा का अंदाज यह नहीं बताता कि उनका पारंपरिक अंदाज या रवैया कैसा है. इस बारे में एमसीसी ने नियम 41.4 का हवाला दिया है. नियम 41.4.1 कहता है, "बल्लेबाज के गेंद का सामना करने के दौरान किसी भी फील्डर का जानबूझकर बल्लेबाज के ध्यान भंग करने की कोशिश अनुचित है"

वहीं नियम 41.4.2 कहता है, अगर कोई भी अंपायर यह पाता है कि किसी भी फील्डर ने ऐसी गतिविधि की है, तो वह तुरंत ही गेंद को डेड बॉल घोषित करेगा और अपने फैसले के पीछे के कारण को दूसरे अंपायर के बारे में बताएगा.

VIDEO: सुनिए कि धोनी के टी-20 टीम से बाहर होने पर क्रिकेट पंडित क्या कह रहे हैं. 

वहीं एमससीसी ने पूरी तरह से साफ करते हुए कहा कि जब तक गेंदबाज का 360 डिग्री पर घूमना गेंदबाज की प्रत्येक गेंद का हिस्सा नहीं होता, तो अंपायर इस बात पर विचार कर सकता है कि क्या गेंदबाज ने 'यह हरकत' बल्लेबाज का ध्यान भंग करने के लिए की है. इसी नियम के आधार पर मैदानी अंपायर विनोद सेशन ने शिवा सिंह की गेंद को डेड बॉल करार दिया.

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हाईलाइट्स
  • नहीं चली बॉलर की चालाकी !
  • ज्यादा चालाकी नहीं चलेगी !
  • क्रिकेट के नियमों की संरक्षक संस्था की सफाई
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